पटना: अगर दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून और हौसला बुलंद हो, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी आपकी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। बिहार के अररिया जिले की रहने वाली रेणुका रंजन ने इस बात को साबित कर दिखाया है। उन्होंने कड़े संघर्ष, अभावों और तमाम मुश्किलों को मात देकर सरकारी नौकरी हासिल की है।
दीए की रोशनी में पढ़ाई और बिना कोचिंग के सफलता रेणुका का शुरुआती जीवन बेहद गरीबी और आर्थिक तंगहाली में बीता। घर में पढ़ाई-लिखाई के लिए बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं थीं, जिसके कारण उन्हें दीए (दीपक) की धीमी रोशनी में रात-रात भर जागकर पढ़ाई करनी पड़ी। आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वे किसी भी कोचिंग संस्थान की फीस नहीं दे सकीं और उन्होंने पूरी तैयारी खुद से ही की।
लगातार असफलताओं के बाद भी नहीं मानी हार सफलता का यह रास्ता रेणुका के लिए आसान नहीं था। शुरुआती दिनों में उन्हें कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का मुंह भी देखना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत हारने के बजाय अपनी गलतियों से सीखा। आखिरकार, अपनी कड़ी मेहनत, निरंतरता और अटूट लगन के दम पर उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार और पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
