रांची: लोक आस्था, श्रद्धा और परंपरा का महापर्व चैती छठ आज, रविवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु भगवान भास्कर और छठी मैया की उपासना करते हैं।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला यह पर्व बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दौरान व्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर सूर्य देव की आराधना करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
जानिए चार दिनों का पूरा कार्यक्रम
पहला दिन – नहाय-खाय (22 मार्च):
पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्धता के साथ सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं, जिसमें कद्दू की सब्जी, चावल और चने की दाल प्रमुख रूप से शामिल होता है। इसे शरीर और मन की शुद्धि का दिन माना जाता है।
दूसरा दिन – खरना (23 मार्च):
खरना के दिन व्रती शाम को सूर्य देव की पूजा करने के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है, जिसमें जल भी ग्रहण नहीं किया जाता।
तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (24 मार्च):
इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। नदियों, तालाबों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और छठी मैया के गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
चौथा दिन – उदीयमान सूर्य को अर्घ्य (25 मार्च):
अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रत का पारण किया जाता है और चार दिवसीय महापर्व का समापन होता है।
चैती छठ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि प्रकृति और सूर्य उपासना का भी प्रतीक है। इस दौरान श्रद्धालु पूरी निष्ठा, अनुशासन और संयम के साथ व्रत का पालन करते हैं, जिससे उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
