गिरिडीह: साइबर अपराधियों ने अब लोगों को चूना लगाने का एक नया और खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है। गिरिडीह में अब ‘आरटीओ (RTO) चालान’ के नाम पर लोगों को डराकर उनके बैंक खाते साफ किए जा रहे हैं। हालांकि, इस गिरोह के एक शातिर अपराधी को दबोचने में गिरिडीह साइबर थाना पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस की गिरफ्त में आया यह ठग लोगों को फर्जी चालान भेजकर अब तक लाखों रुपये उड़ा चुका है।
कैसे देता था ठगी को अंजाम?
पकड़े गए साइबर अपराधी की पहचान संदीप मंडल के रूप में हुई है, जो गिरिडीह के गांडेय थाना क्षेत्र के मार्गोडीह गांव का रहने वाला है। साइबर थाना पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि संदीप का ठगी करने का तरीका बेहद शातिर था:
- वह सबसे पहले वाहन मालिकों को मोबाइल पर आरटीओ (RTO) का फर्जी चालान भेजकर डराता था।
- इसके बाद जुर्माना भरने के नाम पर पीड़ितों को एक फर्जी लिंक (Phishing Link) भेजा जाता था।
- जैसे ही कोई उस लिंक पर क्लिक कर अपनी बैंकिंग डिटेल डालता, संदीप पलक झपकते ही उनके खाते से मोटी रकम उड़ा लेता था।
पहले भी जा चुका है जेल, मोबाइल और फर्जी सिम बरामद
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी संदीप मंडल एक आदतन अपराधी है और पूर्व में भी साइबर अपराध के मामले में जेल की हवा खा चुका है। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने उसके पास से दो मोबाइल फोन और कई फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस इन मोबाइलों के डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए उसके पूरे नेटवर्क और ठगी के शिकार हुए अन्य लोगों का राज खंगाल रही है।
साइबर थाना प्रभारी की अपील: “गिरिडीह में नहीं है RTO का पद” > मामले की जानकारी देते हुए साइबर थाना प्रभारी रामेश्वर भगत ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण बात बताते हुए कहा कि गिरिडीह जिले में आरटीओ (RTO) का कोई पद ही नहीं है (यहाँ जिला परिवहन पदाधिकारी यानी DTO होते हैं)। ऐसे में अगर किसी को आरटीओ के नाम से कोई चालान या मैसेज आता है, तो वह पूरी तरह फर्जी है। लोग ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध मैसेज आने पर तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें।
