रांची: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा को शामिल करने का विवाद सुलझने के बजाय और उलझ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे को सुलझाने के लिए गठित हाई-लेवल कमेटी की दूसरी बैठक भी पूरी तरह बेनतीजा रही। मंत्रियों के बीच आपसी मतभेद इस कदर गहरे हैं कि अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को ही लेना होगा। तब तक इन क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल किए जाने पर संशय के बादल मंडराते रहेंगे।
गठबंधन सरकार में ‘भाषा’ पर रार, बंटे मंत्री
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के नेतृत्व में हुई इस अहम बैठक में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर की खींचतान साफ देखने को मिली। सूत्रों के मुताबिक, कमेटी में शामिल मंत्रियों की राय दो धड़ों में बंट गई है:
- पक्ष में (कांग्रेस और राजद): कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) कोटे के मंत्री इस बात पर अड़े हैं कि भोजपुरी, मगही और अंगिका को JTET में हर हाल में शामिल किया जाए और इसके बाद ही परीक्षा आयोजित हो।
- विपक्ष में (झामुमो): झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) कोटे के सदस्य इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं।
सुदिव्य सोनू ने उठाया कमेटी के गठन पर सवाल
बैठक के दौरान झामुमो कोटे के मंत्री सुदिव्य सोनू ने एक नया पेंच फंसा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कमेटी में अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इस पर संयोजक राधा कृष्ण किशोर ने साफ किया कि अगर मुख्यमंत्री कमेटी का विस्तार करते हैं, तो आगे और बैठकें होंगी; अन्यथा कमेटी की तरफ से यह आखिरी बैठक थी।
अब मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी निगाहें
कमेटी अब अपनी इस असमंजस वाली रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने जा रही है। राजनीतिक खींचतान के बीच इस पूरे विवाद का खामियाजा राज्य के लाखों अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है, जो लंबे समय से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर इस मुद्दे को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो यह राज्य में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक रूप ले सकता है।
