धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले में ग्रामीण विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले मनरेगा कर्मियों का आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 70 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे मनरेगा कर्मचारियों ने सोमवार (18 मई 2026) को एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ‘झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ’ के बैनर तले भारी संख्या में जुटे कर्मियों ने शहर के रणधीर वर्मा चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।
नियमितीकरण और मानदेय बढ़ाने की मांग
जिले के अलग-अलग प्रखंडों (ब्लॉक्स) से पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने अपनी बदहाली पर आक्रोश जताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- नियमितीकरण: लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे कर्मियों को स्थायी किया जाए।
- मानदेय में बढ़ोतरी: वर्तमान महंगाई के अनुरूप मानदेय को सम्मानजनक बनाया जाए।
- सेवा सुरक्षा: नौकरी की सुरक्षा (सर्विस सिक्योरिटी) सुनिश्चित की जाए।
ठप हैं ग्रामीण विकास योजनाएं, सरकार अब तक खामोश
प्रदर्शन के दौरान संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार उन्हें बुनियादी सुविधाएं और सेवा सुरक्षा देने में नाकाम रही है।
“हमारी हड़ताल को 70 दिन बीत चुके हैं, जिससे ग्रामीण विकास के काम प्रभावित हो रहे हैं। बेहद अफसोस की बात है कि इतने लंबे समय के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल या बातचीत की कोशिश नहीं की गई है।” — संघ पदाधिकारी
मनरेगा कर्मियों ने मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द उनकी समस्याओं पर संज्ञान लेने और एक उचित, सकारात्मक फैसला लेकर गतिरोध को समाप्त करने की अपील की है।
