सहरसा (बिहार): डिजिटल इंडिया और चकाचक सड़कों के दावों के बीच बिहार के सहरसा से एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के नवहट्टा प्रखंड स्थित चंद्रायन पंचायत (वार्ड नंबर 4) के ग्रामीण पिछले दो दशकों से एक अदद पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। आलम यह है कि बारिश होते ही पूरा इलाका टापू बन जाता है और मासूम बच्चे घुटनों भर कीचड़ और गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
शिक्षा पर भारी पड़ रहा कीचड़ का सफर
तस्वीरें व्यवस्था की बदहाली बयां करने के लिए काफी हैं। गाँव के स्कूली बच्चे हर दिन अपनी जान और यूनिफॉर्म दोनों को खतरे में डालकर पानी से गुजरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों और बीमारों को अस्पताल ले जाने में भी पसीने छूट जाते हैं। महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं है।
सियासी खींचतान में फंसा सड़क निर्माण
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण की फाइल नेताओं की आपसी राजनीति और खींचतान की भेंट चढ़ चुकी है।
- रुका हुआ काम: जिला परिषद की ओर से सड़क बनाने की पहल तो हुई थी, लेकिन पंचायत स्तर पर विवाद के कारण काम को अधर में लटका दिया गया।
- नेताओं की बेरुखी: ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता जीत के बाद मुड़कर गाँव की सुध भी नहीं लेते।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है। जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए लोगों ने साफ कह दिया है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण और जलजमाव की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
