नई दिल्ली में 18 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने चंबल में अवैध रेत खनन को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने जैसे सख्त आदेश दिए जा सकते हैं।
चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में लगातार हो रहे अवैध रेत खनन पर मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। 18 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रशासनिक विफलता पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए संसाधनों की कमी का हवाला नहीं दे सकती।
मध्य प्रदेश सरकार ने पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में स्वीकार किया था कि उसके वन अधिकारी रेत माफिया से मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हथियारों और संसाधनों से लैस नहीं हैं।
जस्टिस बेंच की सख्त टिप्पणी
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति कानून व्यवस्था को कमजोर करती है और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
अदालत ने यह भी कहा कि प्रवर्तन एजेंसियों को पर्याप्त सुरक्षा और संसाधन न देना शासन व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
तीन राज्यों को तकनीकी निगरानी के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि अवैध खनन वाले क्षेत्रों में हाई-रिजॉल्यूशन और वाई-फाई सक्षम CCTV कैमरे लगाए जाएं।
इसके साथ ही खनन में उपयोग होने वाले वाहनों और मशीनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम लगाने पर भी जोर दिया गया है।
सख्त कार्रवाई की चेतावनी
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि राज्यों ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती, खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और भारी जुर्माने जैसे आदेश दिए जा सकते हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को तय की गई है।
पर्यावरण संरक्षण पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला चंबल क्षेत्र की जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों जैसे घड़ियाल और गंगा डॉल्फिन के संरक्षण से जुड़ा है।
अनियंत्रित खनन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन प्रभावित हो सकता है।
