नई दिल्ली: विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) के अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस की आजादी को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा-आरएसएस पर जोरदार हमला बोला है। खड़गे ने चिंता जताते हुए कहा कि भाजपा शासन के तहत भारत की स्थिति विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में लगातार गिर रही है और अब देश 157वें स्थान पर आ गया है, जो लोकतंत्र के लिए एक शर्मनाक स्थिति है।
‘सत्ता से सवाल पूछना हुआ गुनाह, आज्ञापालन पर मिल रहा इनाम’
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार का संदेश बहुत साफ है— “स्वतंत्र पत्रकारिता को दंडित किया जाएगा और आज्ञापालन करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग अब केवल सत्ता की बात दोहराने तक सीमित रह गया है, जबकि जो पत्रकार जनहित में सवाल पूछ रहे हैं, उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा
खड़गे ने अपने बयान में पत्रकारों के दमन के गंभीर आंकड़े पेश किए:
- गिरफ्तारियां: दावा किया कि 2014 से 2020 के बीच 135 से अधिक पत्रकारों को हिरासत में लिया गया या उनसे पूछताछ की गई।
- कठोर कानून: 2014 और 2023 के बीच 36 पत्रकारों को जेल में डाला गया और कई पर UAPA जैसे सख्त कानून लगाए गए।
- हथियार के रूप में कानून: खड़गे के अनुसार, मानहानि और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल न्याय के लिए नहीं, बल्कि मीडिया को डराने-धमकाने के औजार के रूप में किया जा रहा है।
हत्या और हिंसा का उठाया मुद्दा
कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों की हत्या का जिक्र करते हुए उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जो सत्ता के सामने सच बोलने की भयावह कीमत को दर्शाता है।
“नेहरू का मंत्र आज खतरे में”
पंडित जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को याद करते हुए खड़गे ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता केवल एक नारा नहीं, बल्कि लोकतंत्र का अनिवार्य तत्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस सरकार अब सोशल मीडिया पर भी अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि स्वतंत्र आवाजों को पूरी तरह चुप कराया जा सके।
खड़गे का संदेश: “एक स्वतंत्र प्रेस सरकार की विफलताओं को छिपाने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता की जवाबदेही तय करने के लिए होती है। आज का दिन सभी लोकतांत्रिक शक्तियों के लिए आत्मनिरीक्षण का समय है।”
