रांची: करोड़ों रुपये के बहुचर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में आरोपी राजस्व उप निरीक्षक (राजस्व कर्मचारी) संतोष कुमार वर्मा को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता और जांच की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, जांच में सहयोग न करने पर उठाया सवाल
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस बड़े घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) रिकॉर्ड्स अब तक गायब हैं और जांच एजेंसी उनकी तलाश में जुटी है। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि आरोपी को कई बार नोटिस जारी किए जाने के बावजूद उन्होंने जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया और पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में उन्हें अग्रिम जमानत का लाभ देना उचित नहीं है।
आरोपी का दावा- ‘आईएएस अधिकारी के दबाव का किया था विरोध’
सुनवाई के दौरान आरोपी संतोष कुमार वर्मा के वकील ने अदालत में दलील दी कि जिस विवादित म्यूटेशन के आधार पर यह केस बनाया गया है, वह एक फर्जी रिपोर्ट पर आधारित था और उस पर आरोपी के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। बचाव पक्ष ने दावा किया कि संतोष वर्मा ने इस गलत प्रक्रिया का विरोध किया था, जिसके बाद तत्कालीन उपायुक्त एवं आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे ने उन पर रिपोर्ट बदलने का भारी दबाव बनाया था। बात न मानने पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया और संबंधित आदेश उनके तबादले के बाद जारी हुए थे।
एसीबी का पलटवार- ‘रची गई थी सोची-समझी साजिश’
दूसरी ओर, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। एसीबी ने अदालत को बताया कि सरकारी और बेशकीमती वन भूमि को अवैध रूप से निजी लोगों के नाम ट्रांसफर करने के लिए एक सोची-समझी बड़ी साजिश रची गई थी। जांच एजेंसी ने दावा किया कि कई अहम दस्तावेजों पर आरोपी राजस्व कर्मचारी के हस्ताक्षर मौजूद हैं और मामले के अन्य सह-आरोपियों ने भी अपने बयानों में इनकी संलिप्तता की बात कबूली है।
एसीबी ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि इस घोटाले से जुड़े कई सरकारी रिकॉर्ड या तो गायब कर दिए गए हैं या नष्ट कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आरोपी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (DA) अर्जित करने के मामले में भी एक अलग से प्रारंभिक जांच चल रही है। इन दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी।
