गिरिडीह छठ पर्व: बदहाल घाटों ने नगर निगम पर उठाए सवाल

झारखंड के गिरिडीह में बुधवार, 25 मार्च 2026 को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर चैती छठ महापर्व संपन्न हुआ। शहर के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, लेकिन कई स्थानों पर गंदगी और खराब व्यवस्थाओं ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

गिरिडीह में आस्था के साथ संपन्न हुआ छठ महापर्व

झारखंड के गिरिडीह में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ संपन्न हो गया। शहर के प्रमुख छठ घाट अरघाघाट, पचम्बा बुढ़वा आहार, शास्त्री नगर घाट सहित ग्रामीण क्षेत्रों के घाटों पर व्रतियों की भारी भीड़ देखने को मिली।

बुधवार सुबह भोर से ही श्रद्धालु घाटों की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान चौक-चौराहों पर पारंपरिक छठ गीतों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

व्रतियों ने श्रद्धा और विधि-विधान से किया अर्घ्य

नदी में खड़े होकर व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। 36 घंटे के कठिन उपवास के बाद सूर्य देव के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं की आस्था पूर्ण होती नजर आई।

महिलाओं ने अपने परिवार, बच्चों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता के अनुसार श्रद्धापूर्वक छठ पूजा करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

छठ घाटों पर उमड़ी भीड़

अरघाघाट, पचम्बा बुढ़वा आहार और शास्त्री नगर घाट समेत कई स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में भी छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

घाटों की बदहाल स्थिति ने बढ़ाई परेशानी

छठ पर्व के दौरान कई घाटों की स्थिति चिंताजनक रही। कुछ स्थानों पर नालियों का पानी सीधे नदी में मिल रहा था, जिससे व्रतियों को उसी पानी में खड़े होकर अर्घ्य देना पड़ा।

यह स्थिति नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, खासकर तब जब स्वच्छता को लेकर नियमित दावे किए जाते रहे हैं।

नगर निगम की व्यवस्था पर उठे सवाल

छठ के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं ने गिरिडीह नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

अब यह देखना होगा कि नगर निगम इन समस्याओं को लेकर क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी स्थितियों को सुधारने के लिए क्या प्रयास किए जाते हैं।

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