डेस्क: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में सेंधमारी करने वाले एक बड़े सॉल्वर गैंग का लखीसराय (बिहार) पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की और असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दे रहे 9 फर्जी परीक्षार्थियों (डमी कैंडिडेट्स) समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया है।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एक अभ्यर्थी की जगह डमी कैंडिडेट बैठाने के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक का सौदा किया जाता था।
नामी मेडिकल कॉलेजों के छात्र और बायोमेट्रिक कर्मी शामिल
पकड़े गए आरोपियों में देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के छात्र और दो इंटर्न डॉक्टर भी शामिल हैं, जो सॉल्वर की भूमिका निभा रहे थे। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाली निजी कंपनी के 14 कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो इस पूरे रैकेट में शामिल थे।
मुख्य गिरफ्तारियां:
- अर्पित राज: सॉल्वर गैंग का सरगना (ANMMCH गया का छात्र)
- मयंक कश्यप: PMCH पटना का छात्र
- पूनम कुमारी: BHU नर्सिंग की छात्रा (मधुप्रिया नामक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते पकड़ी गई)
- सौरभ झा: AIIMS रायबरेली का छात्र
- अमन अग्रवाल: यूपी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा, दिल्ली में इंटर्न
- संजीत और उसका भाई: सॉल्वर (संजीत NMCH नर्सिंग का छात्र है)
ऐसे खुली रैकेट की परतें
लखीसराय एसपी प्रेरणा ने बताया कि पुलिस को परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़े का इनपुट मिला था, जिसके बाद राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके हायर सेकेंड्री स्कूल और केंद्रीय विद्यालय में छापेमारी की गई।
जांच में सामने आया कि PMCH का छात्र मयंक कश्यप बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों से सांठगांठ कर खुद कंपनी का कर्मचारी बनकर हसनपुर केंद्र में घुस गया था। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे दबोच लिया, जिससे पूछताछ के बाद पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं और आगे की जांच जारी है।
