नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े मानहानि और जालसाजी के मामले में कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है।
30 अप्रैल 2026 को जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- मामला: असम के मुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई मानहानि और जालसाजी की शिकायत।
- राहत: पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत।
- प्रमुख शर्तें: * जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
- पुलिस स्टेशन बुलाए जाने पर पेश होना होगा।
- सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें प्रभावित करने से बचना होगा।
- कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते।
सुप्रीम कोर्ट की अन्य शर्तें और निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार दिया है कि यदि आवश्यकता महसूस हो तो वह इन शर्तों में कुछ अतिरिक्त शर्तें भी जोड़ सकता है। इसके अलावा, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमानत की इस सुनवाई में जिन तथ्यों या दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है, उनका केस के अंतिम फैसले से कोई संबंध नहीं है। ट्रायल कोर्ट इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार अपनी कार्रवाई करेगा।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुईंया पर आरोप लगाया था। खेड़ा ने दावा किया था कि उनके पास एक से अधिक विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्ति है।
इस बयान के बाद, मुख्यमंत्री की पत्नी की शिकायत पर असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि और जालसाजी का मामला दर्ज किया था।
अदालती सफर
- निचली अदालत और हाईकोर्ट: इससे पहले निचली अदालत और गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- तेलंगाना हाईकोर्ट: इससे पूर्व तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट बेल दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया था।
