नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ‘हूल दिवस’ के ऐतिहासिक अवसर पर संताल विद्रोह के वीर योद्धाओं और अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पीएम मोदी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के अतुलनीय योगदान को याद किया।
मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने का प्रतीक है हूल
अमर सेनानियों को नमन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा:
“हूल दिवस हमारे देश के आदिवासी समाज की उस अद्भुत और अटूट भावना का प्रतीक है, जो अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए सदैव तत्पर रहती है। वीर शहीदों का साहस हमें हमेशा प्रेरित करता रहेगा।”
क्या है ‘हूल दिवस’ का गौरवशाली इतिहास?
गौरतबल है कि देश में हर साल 30 जून को ‘हूल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन साल 1855 में ब्रिटिश औपनिवेशिक हुकूमत के खिलाफ हुए ‘संताल हूल’ (संताल विद्रोह) की याद दिलाता है। यह ऐतिहासिक आंदोलन तत्कालीन अंग्रेजी शासन के दमन, अन्याय और शोषण के खिलाफ आदिवासी समुदाय की एकजुटता और स्वाभिमान की एक जोरदार हुंकार थी, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी।
