पटना का ‘गरीबों का सिनेमा हॉल’: जहाँ सिर्फ 2 समोसे की कीमत में मिलती है मूवी टिकट, जानें 1955 से चल रहे वीणा सिनेमा की अनोखी कहानी

पटना:

आज के दौर में जहां मल्टीप्लेक्स में जाकर फिल्म देखना और पॉपकॉर्न-कोल्डड्रिंक खरीदना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ता है, वहीं बिहार की राजधानी पटना के बीचों-बीच एक ऐसा सिनेमा हॉल आज भी मौजूद है जो आम जनता के बजट में फिट बैठता है। पटना जंक्शन के पास स्थित ‘वीणा सिनेमा’ को लोग प्यार से “गरीबों का सिनेमा हॉल” कहते हैं। यहाँ महज 60 रुपये (यानी 2-3 समोसे की कीमत) में दर्शक आराम से बैठकर नई-पुरानी फिल्मों का मजा ले सकते हैं।

मजदूरों से लेकर रिक्शा चालकों की पहली पसंद

कम दाम और बेहतर सुविधाओं के कारण यह थिएटर ऑटो-रिक्शा चालकों, दैनिक मजदूरों और कम आय वाले परिवारों की पहली पसंद बना हुआ है। वीकेंड हो या किसी नई भोजपुरी या हिंदी फिल्म की रिलीज, यहाँ दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ता है।

1955 में दरभंगा के जमींदार ने रखी थी नींव

वीणा सिनेमा का इतिहास 70 साल पुराना है:

  • शुरुआत: 1955-56 में दरभंगा के एक जमींदार बीरेंद्र कुमार सिंह (हीरा बाबू) ने इस सोच के साथ शुरुआत की थी कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक मनोरंजन पहुंचे।
  • पीढ़ियों की विरासत: हीरा बाबू के बाद उनके बेटे सुनील कुमार सिंह (गोपाल बाबू) और अब तीसरी पीढ़ी यानी हीरा बाबू के पोते राजेश कुमार सिंह (रिंकू जी) इसका संचालन कर रहे हैं।

कम कीमत, लेकिन आधुनिक सुविधाएं

वीणा सिनेमा के डायरेक्टर जीतेंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, वर्ष 2004 में यहाँ का टिकट 25 से 60 रुपये तक हुआ करता था। समय बदला पर आज भी यहाँ अधिकतम टिकट सिर्फ 100 रुपये (60, 80 और 100 रुपये) है।

सस्ता होने का मतलब यह नहीं कि यहाँ सुविधाओं से समझौता किया गया है। दर्शकों के आराम के लिए यहाँ:

  • पुशबैक सीटें
  • एयर कूलिंग सिस्टम
  • डॉल्बी साउंड सिस्टम
  • 4K डिजिटल प्रोजेक्टर जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मल्टीप्लेक्स के दौर में भी वीणा सिनेमा अपनी पुरानी यादों, सस्ती टिकटों और भोजपुरी-बॉलीवुड फिल्मों के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है।

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