अन्नापोलिस (अमेरिका): भारत द्वारा 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन और पहले ही दिन व्यापक साझा घोषणापत्र जारी करने की वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है। अमेरिका के प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि भारत की इस सफल मेजबानी ने यह साबित कर दिया है कि वह अलग-अलग विचारधाराओं और हितों वाले देशों के बीच भी सर्वसम्मति बनाने में पूरी तरह सक्षम है।
ब्रिक्स की बढ़ती स्वीकार्यता का प्रमाण ‘अटलांटिक काउंसिल’ में दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने कहा कि शिखर सम्मेलन का साझा घोषणापत्र भारत के उत्कृष्ट आयोजन कौशल के साथ-साथ ब्रिक्स समूह की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि 18वां ब्रिक्स वार्षिक शिखर सम्मेलन 12 से 13 सितंबर तक भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित किया गया। ब्रिक्स दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली समूह है, जो वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत हिस्से और दुनिया की कुल जीडीपी (GDP) के 40 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
शीर्ष वैश्विक नेताओं की मौजूदगी और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ इस दो दिवसीय सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान सभी देशों ने सर्वसम्मति से ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को स्वीकार किया।
घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाते हुए एकतरफा शुल्क (Tariffs) और गैर-शुल्क बाधाओं में बढ़ोतरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार संतुलन को बिगाड़ते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के स्थापित नियमों का सीधा उल्लंघन करते हैं।
