रांची: सरकारी कामकाज में लापरवाही, उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और कर्तव्यों के प्रति मनमानी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर झारखंड सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सरकार द्वारा 1 जनवरी से 14 सितंबर तक चलाए गए विशेष अभियान के तहत कुल 312 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
वेतन रोकने से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नियम का उल्लंघन करने और काम में शिथिलता बरतने पर अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की गई है:
- वेतन पर रोक: 142 कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।
- सेवा पुस्तिका में दर्ज: 88 कर्मचारियों की सर्विस बुक में प्रतिकूल टिप्पणी (निंदा) दर्ज की गई है।
- वेतन वृद्धि में कटौती: 54 कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) पर रोक लगाई गई है।
- कड़ा निलंबन: सबसे गंभीर मामलों में संलिप्त 28 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वित्तीय गड़बड़ी और बिना सूचना गायब रहने पर शिकंजा कार्रवाई के दायरे में आए कर्मचारियों पर मुख्य रूप से वित्तीय अनियमितताओं और बिना किसी पूर्व सूचना के लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने जैसे गंभीर आरोप हैं। सरकार ने इन सभी मामलों में संबंधित विभागों को गहन विभागीय जांच (Departmental Inquiry) चलाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
सरकार का स्पष्ट कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और जनता के प्रति जवाबदेही तय करना है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में भी काम में कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।
